मलाला ने दिखा दिया कि हौंसले की हमेशा जीत होती है। मलाला युसुफजई ने दुनिया को बताया कि किस तरह संघर्ष किया जाता है। उसने यह भी बत...
मलाला युसुफजई ने दुनिया को बताया कि किस तरह संघर्ष किया जाता है। उसने यह भी बताया कि कोई चाहे तो कुछ भी हासिल कर सकता है। वह शिक्षा का हक दुनिया की हर लड़की को दिलाना चाहती है। वह चाहती है कि अफगानिस्तान और पाकिस्तान की वे लड़कियां जिन्हें पढ़ने से रोका जा रहा है वे शिक्षित हों और नये मुकाम हासिल करें।
तालिबान ने मलाला को सिर में गोली मारी थी क्योंकि वह उनसे डरी नहीं। उसने लड़कियों की पढ़ाई को लेकर तालिबानी प्रतिबंध को मानने से इंकार किया था। वह बीबीसी उर्दू के लिए एक डायरी लिखती थी जिसमें उसने तालिबान की कारगुजारियों को सलीके से बयान किया था। यह उन्हें नागवार गुजरा। उन्होंने इसे मजहब पर हमला करार दिया और एक निहत्थी किशोरी पर उस समय हमला किया जब वह अपने साथियों के साथ स्कूल जा रही थी।
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आज मलाला दुनिया में हौंसले का दूसरा नाम है। उसके नाम से मलाला डे भी मनाया जाता है। उसके विचार सुनने के लिए लोग उतावले रहते हैं। उसने दुनिया को दिखा दिया कि हौंसले की हमेशा जीत होती है।
आइये जानते हैं कि मलाला से हमने तीन अहम बातें क्या सीखीं :
डर नाम की कोई चीज नहीं होती
मलाला ने जिस तरह तालिबान का सामना किया। उसके भय को मन से निकाला और सामने आयी, उसकी जितनी प्रशंसा की जा सकती है उतनी कम है। जब तालिबान ने लड़कियों की शिक्षा पर रोक लगायी तो वह शुरु में थोड़ी घबराई, लेकिन उसने डर को खुद से जुदा किया। उसने डर को मानने से इंकार किया कि वह कुछ नहीं होता। डर नाम की कोई चीज नहीं होती और डर से दुनिया नहीं चलती। इसलिए वह स्कूल जाती रही। अपनी पढ़ाई के लिए उसने डर से समझौता नहीं किया। उसने कर दिखाया कि एक लड़की कितनी हिम्मत वाली हो सकती है।
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अपने हक के लिए लड़ो
मलाला ने हमें सिखाया कि हर व्यक्ति को अपने हक के लिए लड़ना चाहिए। उसे पीछे हटने वाली भूल कभी नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से इंसान अपनी नजरों में ही गिर जाता है। यह उसकी खुद के सामने बहुत बड़ी हार की तरह होता है। मलाला ने शिक्षा जो उसका हक था उसके लिए तालिबान से लोहा लिया। उसने अपनी मौत की चिंता न करते हुए अपना अभियान जारी रखा। आज भी वह लड़कियों को उनका पहला हक यानि शिक्षा दिलाना चाहती है।
खुद पर भरोसा होना चाहिए
भरोसा किसी के लिए भी अहम होता है। भरोसे से दुनिया जीती जा सकती है। दूसरों पर भरोसा करना अलग बात है और खुद पर भरोसा करना अलग बात। यदि इंसान खुद पर भरोसा करना सीख जाये तो उसके लिए हर मंजिल आसान हो सकती है। वह अपने भाग्य का मालिक खुद हो सकता है। वह अपनी कहानी खुद लिख सकता है और निश्चित तौर पर जीत उसका दामन चूमेगी।
-अमित कुमार / हरमिन्दर सिंह चाहल.
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